पंचांग व मुहूर्त6 min मिनट का पाठ · 2026-06
विवाह मुहूर्त वह शुभ खिड़की है जो विवाह को आशीर्वाद देने हेतु चुनी जाती है। जानिए सही विवाह मुहूर्त चुनने में कौन-से तत्व देखे जाते हैं।
मुहूर्त एक चयनित समय है — किसी महत्वपूर्ण कार्य को आरंभ करने के लिए सावधानी से चुना गया क्षण, ताकि वह अनुकूल आकाश के नीचे प्रारंभ हो। विवाह मुहूर्त इनमें सर्वाधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि विवाह आजीवन बंधन है जिसे परंपरा सबसे सुदृढ़ आधार पर आरंभ करना चाहती है।
मुहूर्त-शास्त्र ज्योतिष की एक स्वतंत्र शाखा है जिसके अपने नियम हैं, और जो वर-वधू की जन्म कुंडलियों के ऊपर लागू होते हैं।
विवाह-तिथि का चयन पंचांग से आरंभ होता है। शुभ तिथियाँ चुनी जाती हैं और अशुभ छोड़ी जाती हैं; विवाह के लिए परंपरागत रूप से रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, उत्तरा भाद्रपदा और रेवती जैसे अनुकूल नक्षत्र लिए जाते हैं।
कुछ वार, योग और करण वरीय होते हैं, तथा राहु काल एवं शुक्र या गुरु के अस्त होने की अवधि (गुरु/शुक्र अस्त) जैसे अशुभ काल छोड़े जाते हैं। विवाह का मौसम स्वयं इन्हीं ग्रह-नियमों का अनुसरण करता है।
पंचांग से आगे, ठीक उसी क्षण के लिए बनाई गई मुहूर्त-कुंडली भी महत्व रखती है। चुने गए समय पर बलवान लग्न और सुस्थित चंद्र खोजा जाता है, सप्तम भाव को शुभ ग्रहों का सहारा मिले और संवेदनशील बिंदुओं से पापग्रह दूर रहें।
वर और वधू की अपनी कुंडलियाँ तथा दशाएँ भी देखी जाती हैं, ताकि तिथि केवल अमूर्त कैलेंडर से नहीं बल्कि दोनों व्यक्तियों से मेल खाए।
व्यवहार में परिवार ज्योतिषीय आदर्शों को स्थल, मौसम और सुविधा की वास्तविक सीमाओं के साथ संतुलित करते हैं। कुशल ज्योतिषी किसी एक पूर्ण क्षण पर अड़ने के बजाय उपलब्ध सर्वोत्तम खिड़कियाँ प्रस्तुत करता है।
उद्देश्य अंधविश्वास नहीं, संकल्प है: विवाह को सचेत रूप से, ऐसे समय पर आरंभ करना जो आशीर्वाद और शुभ शकुन लिए हुए अनुभव हो।
यह विवाह संपन्न करने हेतु ज्योतिषीय रूप से चुना गया शुभ समय है, ताकि संबंध अनुकूल ग्रह-स्थितियों में आरंभ हो।
परंपरागत रूप से रोहिणी, मघा, हस्त, स्वाति, अनुराधा, मूल, उत्तरा फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा, उत्तरा भाद्रपदा और रेवती अनुकूल माने जाते हैं।
हाँ। अच्छा मुहूर्त केवल सामान्य पंचांग से नहीं, बल्कि दोनों की कुंडलियों और दशाओं से भी मेल खाता है।
पढ़ना एक बात है — इन सिद्धांतों को अपनी जन्मकुंडली में देखना दूसरी। कुछ ही क्षणों में अपनी निःशुल्क, सटीक वैदिक कुंडली बनाएँ।
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