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राहु काल और दिन के अशुभ समय

पंचांग व मुहूर्त5 min मिनट का पाठ · 2026-06

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राहु काल वह दैनिक अवधि है जिसे नए कार्यों के आरंभ के लिए परंपरागत रूप से छोड़ा जाता है। जानिए इसकी गणना और अन्य कौन-से काल ध्यान देने योग्य हैं।

राहु काल है क्या

राहु काल प्रतिदिन लगभग 90 मिनट की वह अवधि है जिसका स्वामी छाया-नोड राहु है, और जिसे महत्वपूर्ण नए कार्य आरंभ करने के लिए परंपरागत रूप से अशुभ माना जाता है। अनेक लोग इस खिड़की में यात्रा आरंभ करने, अनुबंध पर हस्ताक्षर करने या समारोह करने से बचते हैं, यद्यपि पहले से चल रहे कार्य सामान्यतः अप्रभावित रहते हैं।

गणना कैसे होती है

राहु काल दिन के भाग — सूर्योदय से सूर्यास्त तक — को आठ बराबर हिस्सों में बाँटकर निकाला जाता है। प्रत्येक वार इन आठ में से किसी एक विशेष हिस्से को राहु काल नियत करता है: जैसे सोमवार को यह जिस खंड में पड़ता है, मंगलवार को उससे भिन्न में। चूँकि सूर्योदय और सूर्यास्त तिथि तथा स्थान के अनुसार बदलते हैं, सटीक समय प्रतिदिन और प्रत्येक नगर में बदलता रहता है।

इसीलिए विश्वसनीय पंचांग राहु काल की गणना किसी स्थिर घड़ी-समय से नहीं, बल्कि आपके स्थान के लिए ठीक-ठीक करता है।

ध्यान देने योग्य अन्य काल

दो संबंधित अशुभ अवधियाँ यमगंड और गुलिक काल हैं, जिनकी गणना उसी अष्टधा विभाजन से होती है पर स्वामी भिन्न हैं। गुलिक (शनि-पुत्र से संबद्ध) और यमगंड को भी शुभ आरंभों के लिए छोड़ा जाता है।

इसके विपरीत अभिजित मुहूर्त — मध्याह्न के आसपास की एक छोटी, सामान्यतः शुभ खिड़की — प्रायः तब प्रयोग किया जाता है जब कोई अन्य मुहूर्त उपलब्ध न हो। मिलकर ये अवधियाँ दिनभर के कार्यों का समय तय करने में सहायक होती हैं।

सामान्य प्रश्न

राहु काल क्या है?

यह प्रतिदिन लगभग 90 मिनट की राहु-शासित अवधि है, जिसे महत्वपूर्ण नए कार्य आरंभ करने के लिए परंपरागत रूप से छोड़ा जाता है।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के दिन को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है, और प्रत्येक वार राहु काल को एक विशेष भाग में नियत करता है।

अभिजित मुहूर्त क्या है?

अभिजित मध्याह्न के आसपास की एक छोटी शुभ खिड़की है, जिसे प्रायः तब प्रयोग किया जाता है जब कोई अन्य शुभ मुहूर्त उपलब्ध न हो।

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