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मकर संक्रांति — सूर्य का मकर में प्रवेश

त्योहार व व्रत5 min मिनट का पाठ · 2026-06

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मकर संक्रांति उन थोड़े-से सौर पर्वों में है जो सूर्य के मकर राशि में प्रवेश को चिह्नित करता है। जानिए इसका खगोल और महत्व।

एक सौर पर्व

अधिकांश हिंदू पर्व चंद्र कैलेंडर का अनुसरण करते हैं, पर मकर संक्रांति उन थोड़े-से पर्वों में है जिनका काल सूर्य से निश्चित होता है। यह उस क्षण को चिह्नित करती है जब सूर्य निरयण मकर राशि में प्रवेश करता है — इस संक्रमण को मकर संक्रांति कहते हैं — और यह प्रतिवर्ष लगभग 14 या 15 जनवरी को पड़ती है।

सौर होने के कारण सामान्य कैलेंडर में इसकी तिथि उल्लेखनीय रूप से स्थिर रहती है, उन चंद्र पर्वों के विपरीत जो हर वर्ष खिसकते हैं।

उत्तरायण — उत्तर की यात्रा

संक्रांति उत्तरायण का आरंभ चिह्नित करती है — वह काल जब सूर्य अपनी आभासी उत्तरमुखी यात्रा आरंभ करता है, जिसे परंपरागत रूप से शुभ तथा बढ़ते प्रकाश और ऊष्मा का समय माना जाता है। दिनों का लंबा होना अंधकार से प्रकाश की ओर गति का प्रतीक है।

यह उत्तर-मोड़ इतना पवित्र माना जाता था कि महाभारत में कहा गया है कि भीष्म ने देह त्यागने से पूर्व इसी की प्रतीक्षा की थी।

रीति और उत्सव

मकर संक्रांति पूरे भारत में अनेक नामों से मनाई जाती है — तमिलनाडु में पोंगल, पंजाब में एक दिन पूर्व लोहड़ी, असम में बिहू, गुजरात में पतंगों के साथ उत्तरायण। समान सूत्र हैं सूर्य का सम्मान, फसल, तिल-गुड़ की मिठाइयाँ, और पवित्र नदियों में स्नान।

सूर्य और फसल के पर्व के रूप में यह ऊष्मा, प्रकाश और धरती की समृद्धि के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करती है।

सामान्य प्रश्न

मकर संक्रांति किसका उत्सव है?

यह सूर्य के मकर राशि में प्रवेश और उत्तरायण — सूर्य की शुभ उत्तरमुखी यात्रा — के आरंभ को चिह्नित करती है।

अन्य पर्वों के विपरीत इसकी तिथि स्थिर क्यों रहती है?

मकर संक्रांति सौर पर्व है जो सूर्य के गोचर से बँधा है, इसलिए यह प्रतिवर्ष 14-15 जनवरी के आसपास ही पड़ती है।

उत्तरायण क्या है?

उत्तरायण सूर्य की आभासी उत्तरमुखी गति का काल है, जिसे परंपरागत रूप से शुभ और बढ़ते प्रकाश का समय माना जाता है।

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