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🪔 दावणगेरे में दशहरा

दशहरा (विजयादशमी) · कर्नाटक, भारत

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विजयादशमी भगवान राम की रावण पर और माँ दुर्गा की महिषासुर पर विजय का पर्व है — अधर्म पर धर्म की जीत। यह नवरात्रि का समापन है, और इसका विजय मुहूर्त किसी भी नए कार्य के आरंभ के लिए वर्ष के सबसे शुभ क्षणों में माना जाता है।

तिथि कैसे निर्धारित होती है

दशहरा उस दिन मनाया जाता है जब अपराह्न काल (दिन के पाँच भागों में चौथा) में दशमी हो।

विजय मुहूर्त और अपराह्न

इस दिन की पूजा — शमी पूजन, अपराजिता पूजन और शस्त्र पूजन — अपराह्न में की जाती है। दिन का ग्यारहवाँ मुहूर्त विजय मुहूर्त कहलाता है, जो यात्रा, नए कार्य या विद्यारंभ के लिए पारंपरिक रूप से चुना जाता है।

यह पर्व कैसे मनाया जाता है

उत्तर भारत में रामलीला के बाद रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतले जलाए जाते हैं; बंगाल में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन होता है; मैसूर में राजसी शोभायात्रा निकलती है; दक्षिण में औज़ारों और पुस्तकों की पूजा होती है। पूरे भारत में यह सोना, वाहन और संपत्ति खरीदने का भी दिन है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

में दशहरा कब है?

दावणगेरे में दशहरा (विजयादशमी) को है।

विजय मुहूर्त क्या है?

विजयादशमी पर दिन के पंद्रह मुहूर्तों में ग्यारहवाँ, जिसमें आरंभ किया गया कार्य सफल माना जाता है; दावणगेरे का समय इस पृष्ठ पर है।

अन्य शहरों में दशहरा

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दावणगेरे में अन्य त्योहार

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