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🪔 गोरखपुर में धनतेरस

धनतेरस पूजा मुहूर्त · उत्तर प्रदेश, भारत

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धनतेरस दीपावली के पाँच दिनों का आरंभ है। यह समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए भगवान धन्वंतरि के साथ माँ लक्ष्मी और कुबेर की आराधना का दिन है। सोना, चाँदी और नए बर्तन खरीदने के लिए यह वर्ष का सबसे शुभ दिन है, और संध्या को द्वार पर यम के लिए दीप (यम दीपदान) जलाया जाता है।

तिथि कैसे निर्धारित होती है

धनतेरस उस दिन मनाई जाती है जब प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद रात्रि का पहला पाँचवाँ भाग) में त्रयोदशी हो।

प्रदोष और वृषभ ही क्यों

पूजा प्रदोष काल में की जाती है, और स्थिर लग्न वृषभ के उदय में सर्वोत्तम मानी जाती है, ताकि आवाहित समृद्धि स्थिर रहे। इस पृष्ठ पर पूजा मुहूर्त प्रदोष का वह भाग है जिसमें वृषभ लग्न उदित हो और त्रयोदशी भी हो।

क्या खरीदें

सोने-चाँदी के सिक्के या आभूषण, पीतल व ताँबे के बर्तन, नई झाड़ू (लक्ष्मी के स्वागत हेतु) और कई घरों में पूजा के लिए धनिया। व्यापारी इसी समय नए बही-खाते भी आरंभ करते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

में धनतेरस कब है?

गोरखपुर में धनतेरस को है।

धनतेरस पूजा मुहूर्त क्या है?

प्रदोष काल का वह भाग जिसमें वृषभ लग्न हो और त्रयोदशी भी हो; गोरखपुर का समय इस पृष्ठ पर है।

अन्य शहरों में धनतेरस

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