नक्षत्र5 min मिनट का पाठ · 2026-06
रोहिणी चंद्र का प्रिय तारा है — उर्वर, सुंदर और गहन सृजनशील। जानिए रोहिणी जातकों के देवता, प्रतीक और स्वभाव।
रोहिणी चौथा नक्षत्र है, जो वृषभ में स्थित है और जिसका स्वामी चंद्र है। इसके देवता सृष्टिकर्ता ब्रह्मा हैं और प्रतीक शकट अर्थात् रथ। कथा है कि चंद्र अपनी सभी नक्षत्र-पत्नियों में रोहिणी से सर्वाधिक प्रेम करते थे — इसी से इस तारे को आकर्षण, सौंदर्य और चुंबकीय खिंचाव की ख्याति मिली।
रोहिणी वृद्धि, उर्वरता, पोषण और भौतिक समृद्धि से जुड़ी है — बीज के पककर फसल बनने की प्रक्रिया।
रोहिणी जातक प्रायः आकर्षक, सौंदर्यप्रिय, कलात्मक और स्नेहिल होते हैं, जिनमें सौंदर्य, सुविधा और जीवन की उत्तम वस्तुओं के प्रति गहरी समझ रहती है। ये सृजनशील और उत्पादक हैं, कार्यों को फल तक पहुँचाने में सक्षम, और लोगों तथा संसाधनों को अपनी ओर खींचते हैं।
चंद्र-स्वामित्व और शुक्र की राशि वृषभ में स्थिति — रोहिणी भावनात्मक गहराई को भौतिक तथा सौंदर्यपरक परिष्कार से जोड़ती है।
रोहिणी जातक कला, संगीत, कृषि, फैशन, सौंदर्य, आतिथ्य, वित्त तथा सृजन, वृद्धि या वैभव से जुड़े किसी भी क्षेत्र में फलते-फूलते हैं। उनका आकर्षण और उत्पादकता उनके काम आते हैं।
छाया-पक्ष है अधिकार-भावना, भौतिकता और भोग की प्रवृत्ति। उदारता और अनासक्ति विकसित करने से रोहिणी की समृद्धि संचित होने के बजाय प्रवाहित बनी रहती है।
रोहिणी का स्वामी चंद्र है और यह वृषभ राशि में स्थित है, जो भावनात्मक गहराई को सौंदर्यपरक परिष्कार से जोड़ता है।
सौंदर्य, आकर्षण, सृजनशीलता, उर्वरता और भौतिक समृद्धि के लिए — यह चंद्र के नक्षत्रों में सर्वाधिक प्रिय है।
कला, संगीत, कृषि, फैशन, आतिथ्य और वित्त — रोहिणी के सृजनशील, वृद्धि-उन्मुख स्वभाव के अनुकूल।
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