अंक ज्योतिष6 min मिनट का पाठ · 2026-06
1 से 9 तक प्रत्येक अंक किसी ग्रह की ऊर्जा वहन करता है। जानिए प्रत्येक अंक का अर्थ और उसके पीछे की ग्रह-शक्ति।
वैदिक अंक ज्योतिष में प्रत्येक एकल अंक का एक ग्रह-स्वामी है, इसलिए किसी अंक को पढ़ना वस्तुतः किसी ग्रह को पढ़ना है। कैल्डियन और वैदिक परंपराओं से प्रचलित यह पद्धति व्यक्तित्व-अंकों को सीधे सूर्य, चंद्र और शेष नौ के गुणों से जोड़ती है।
इन संगतियों को जान लेने पर मूलांक या भाग्यांक को स्वभाव के जीवंत चित्र में अनूदित किया जा सकता है।
अंक 1 (सूर्य) नेता है: आत्मविश्वासी, स्वतंत्र, महत्वाकांक्षी और अधिकारप्रिय। अंक 2 (चंद्र) संवेदनशील, भावुक, पोषक और कूटनीतिक है, कभी-कभी मनोदशा-प्रधान। अंक 3 (गुरु) ज्ञानी, आशावादी, विस्तारशील और अनुशासित है, शिक्षण तथा वृद्धि की ओर आकृष्ट।
अंक 4 (राहु) अपरंपरागत, परिश्रमी और विद्रोही है, आकस्मिक उत्थान में सक्षम पर बेचैनी तथा अपरंपरागत मार्गों की ओर प्रवृत्त।
अंक 5 (बुध) तीव्र, संवादप्रिय, बहुमुखी और व्यापारिक है — अंकों में सर्वाधिक मैत्रीपूर्ण। अंक 6 (शुक्र) आकर्षक, प्रेमपूर्ण, कलात्मक तथा सौंदर्य और सुविधा की ओर झुका हुआ। अंक 7 (केतु) सहज-बोधी, रहस्यप्रिय, अंतर्मुखी और आध्यात्मिक प्रवृत्ति का है।
अंक 8 (शनि) अनुशासित, महत्वाकांक्षी और कर्म-प्रधान है, जो धीरे पर प्रबल रूप से उपलब्धि पाता है। अंक 9 (मंगल) साहसी, ऊर्जावान, दृढ़ और रक्षक है, योद्धा की गति लिए हुए।
जैसे ग्रहों में मित्रता-शत्रुता होती है, वैसे ही अंकों में भी। सूर्य (1) और चंद्र (2) अधिकांश अंकों से मैत्री रखते हैं, जबकि शनि (8) तथा नोड (4 और 7) एक अधिक जटिल समूह बनाते हैं जो प्रायः परस्पर अनुनादित होता है।
अंक ज्योतिषी इन्हीं आत्मीयताओं से लोगों के बीच अनुकूलता आँकते हैं और अनुकूल नाम, तिथियाँ तथा निर्णय सुझाते हैं।
वैदिक अंक ज्योतिष 1-9 तक प्रत्येक अंक को एक स्वामी ग्रह देता है, इसलिए हर अंक उस ग्रह के गुण और ऊर्जा वहन करता है।
अंक 8 का स्वामी शनि है, जो इसे अनुशासन, महत्वाकांक्षा और प्रबल कर्म-प्रधान, धीमा-पर-शक्तिशाली स्वभाव देता है।
हाँ। ग्रहों की भाँति अंकों में भी मित्रता और शत्रुता होती है, जिससे अंक ज्योतिषी अनुकूलता आँकते हैं।
पढ़ना एक बात है — इन सिद्धांतों को अपनी जन्मकुंडली में देखना दूसरी। कुछ ही क्षणों में अपनी निःशुल्क, सटीक वैदिक कुंडली बनाएँ।
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